रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार

सार्वजनिक निजी साझेदारी के माध्यम से 1396 सरकारी आईटीआई'ज का उन्नयन

 

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करार ज्ञापन

संस्थान विकास योजना

दिशानिर्देश

फोटो गैलरी

तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रोफार्मा

अक्सर पछे जाने वाले प्रश्न

आईटीआई की स्थिति

वित्तीय एवं अधिप्राप्ति प्रक्रिया

दिशानिर्देश (हिंदी)

पुष्ठभूमि

कुशल कार्यबल के लिए उभरती आवश्यकताओं के साथ भारत की अर्थव्यवस्था तेजी के साथ बढ़ रही है जो श्रम बाजार की कार्यक्षमता और लचीलेपन को बढ़ाती है, कौशल संबंधी अवरोधों को कम करती है और गतिशीलता और उत्पादकता को बढ़ाती है। देश के प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक मानव शक्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रो में कौशल की शिक्षा देने के लिए 50 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई टी आई) की स्थापना के द्वारा रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने 1950 में शिल्पकार प्रशिक्षण योजना की शुरूआत की। तेजी के साथ बढ़ते आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी एवं कार्य प्रकिया में परिवर्तन और अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण के कारण कुशल मानव शक्ति की मांग में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है। 01.01.2007 तक देश में 1896 सरकारी आई टी आई थी। इनमें से 500 आई टी आई को 2005-06 में आरंभ एक योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट केंद्र बनाया जा रहा है। शेष 1396 सरकारी आई टी आई को उत्कृष्ट केंद्र बनाने की शुरूआत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम में 2007-08 में हो गई है।

 उद्देश्य

योजना का उद्देश्य देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण के स्तर को बढ़ाना और इसे मांग प्रेरित बनाना है ताकि स्नातकों को अच्छा रोजगार मिलना सुनिशचित हो।

मुख्य विशेषताएं

योजना के अंतर्गत चुने गए प्रत्येक आई टी आई के स्तर को बढ़ाने की प्रक्रिया को नेतृत्व प्रदान करने के लिए एक उद्योग साझेदार को जोड़ा जाता है। उद्योग साझेदार की अध्यक्षता में संस्थान प्रबंध समिति (आई एम सी) का निर्माण किया जाता है और सोसायटी  के रूप में उसका पंजीकरण किया जाता है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उद्योग साझेदार के बीच सभी पक्षों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हुए करार के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाते है। केंद्र सरकार द्वारा 2.5 करोङ तक का ब्याज मुक्त कर्ज सीधे आई एम सी को इसकें द्वारा तैयार संस्थान विकास योजना (आई डी पी) के आधार पर दिया जाता है। आई एम सी द्वारा कर्ज का पुनःभुगतान 3 वर्षों में तथा 10 वर्ष के अधिस्थगन काल तथा उसके बाद समान वार्षिक किश्तों में 20 वर्षो में किया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत आई एम सी को आई टी आई के मामलों को देखने की वित्तीय और शैक्षणिक स्वायतत्ता प्रदान की जाती है। आई एम सी को आई टी आई में प्रवेश के 20 प्रतिशत तक के निर्धारण की अनुमति होती है। उद्योग साझेदार आई टी आई को वित्तीय सहायता के साथ-साथ मशीन तथा उपकरण प्रदान कर सकते है। यह प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने तथा उन्हें कार्य पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करेगें। राज्य सरकारें आई टी आई की स्वामी बनी रहेंगी और प्रवेश का नियमन करती रहेंगी।

 

 

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